आप इस लड़के को बचाना चाहेंगे, या इसकी आत्महत्या के बाद एक और कैंडल मार्च निकालना चाहेंगे?

आज हमारा देश एक ऐसी स्थिति से गुजर रहा है जहां एक तरफ तो महिला को, पत्नि, मित्र, प्रेमिका, लिव-इन पार्टनर, यहाँ तक कि एक वैश्या के रूप में भी सशक्ति किया जा रहा है और दूसरी तरफ एक माँ, बहन, भाभी, ताई, चाची, बूआ आदि के रूप में उन्हें महिला ही नहीं माना जाता।

जब यहाँ छद्म महिला सशक्तिकरण इस कदर सर चढ़ कर बोल रहा है कि नारिवादी शक्तियों के दबाव में सरकार बिना कुछ सोचे समझे कानून बनाने पर आमादा है, तो यहाँ एक पुरुष का यह उम्मीद करना कि उसे भी न्याय मिल सकता है, बेमानी है, एक धोखा है।

एक लड़के ने एक लड़की से इस कदर प्यार किया कि अपना सबकुछ लुटा दिया, परन्तु उस लड़की ने इस लड़के का इस कदर शारीरिक, आर्थिक और मानसिक शोषण कर धोखा दिया कि उसे लगने लगा कि अब आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता शेष नहीं है।      

आत्महत्या को आमादा इस लड़के को जब समझाया गया तो इसने न्याय पाने का मार्ग पूंछ, क्योंकि वो जानता है कि उसके सच के लिए भी कोई कानून नहीं है ओर जससे वह प्रेम करता है, उसके झूठ को भी समर्थन देने के लिए एक पूरा मंत्रालय है, आयोग है और हमारी नारिवादी न्यायपालिका है।

उस लड़के की हकीकत, उसी के शब्दों में:

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हम उस व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहते हें जिसने इस लड़के को, भारत की पहली व एक मात्र पुरुष हेल्पलाइन SIF-One पर, यानी 8882-498-498 पर कॉल कर सहायता मांगने के लिए प्रेरित किया।

यह लड़का अगर सम्पर्क में न आया होता, तो शायद यह हकीकत इस लड़के के आत्महत्या करने के बाद सुसाइड नोट में ही पढ़ने को मिलती।

अब आप निर्णय करें कि आप इस लड़के को बचाना चाहेंगे और न्याय दिलाना चाहेंगे, या इसके आत्महत्या कर लेने के बाद एक और कैंडल मार्च निकालना चाहेंगे?

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